Monday, 1 July 2013

पूर्वजो का इतिहास !

सुना आपने , दिग्गी  राजा के पुर्वज अंग्रेजों के मुखबिर थे , ऐसा हम नहीं शिवसेना वालों ने,  काफी रिसर्च करने के बाद  पता लगाया है ! अब अगर आप अपनी यादास्त को खंगालेंगे तो कुछ दिनों पहले ऐसी ही खोज दिग्गी राजा  ने भी किया था ....कि महान रास्ट्रवादी यानि की महारास्ट्रवादी, हिन्दु ह्रदय सम्राट श्री बाला साहेब ठाकरे के पुर्बज महारास्ट्र  में बिहार से आये थे !  अब भला जिनकी  राजनीति का महल ही उत्तरभारतीयों के विरोध पर टिका हो वो इस बात को कैसे हजम कर सकता है सो लग गए साहब  लोग इतिहास की खुदाई करने .....अब पता नहीं कौन से इतिहास में इसका जिक्र है पर एक दुसरे के पूर्वजों पर ऐसा अध्ययन और खोज शायद आम जनता को सोचने और समझने पर तो विवश करता ही है !
अब आम जनता को ये बात समझ नहीं आती की कभी तो शिवसेना वाले अपने आपको हिन्दू समर्थक और रास्ट्रवादी कहते है और बाबरी मस्जिद को  तोड़ने वालों को शिवसैनिक बताने में गौरवान्वित महसूस करते हैं और कभी सब कुछ भूलकर पूरा का पूरा ठाकरे खानदान उत्तरभारतीयों को मुंबई से खदेरने और अपने आपको सबसे बड़ा मराठा मानुष साबित करने लगते है ...अरे भाई साहब, बाला साहेब के सुपूत्रो आप जरा देश की जनता को ये बताने की तकलीफ लेंगे की सिर्फ महारास्ट्र  के हिन्दुओ को आप हिन्दू मानते हैं या उत्तरभारत के हिन्दु भी आपकी नजर में हिन्दु हैं? अगर नहीं हैं तो बाबरी मस्जिद ढाहने का सारा क्रेडिट क्यों लेना चाहते थे ?
वो तो सिर्फ मराठा मानुष का काम नहीं था ! अगर जबाब नहीं मिल रहा तो हम बतला देते है आपको दरअसल आपका न तो कोई धर्म है न ही कोई ईमान .....न तो आप हिन्दु हैं न ही मराठी'   ........न तो आप भारतीय  हैं न ही महारास्ट्रीय ......आपका चरित्र उस  दोगले भारतीय का है जो हमेशा से भारत माता के सीने को छलनी करता आया है कभी धर्म नाम पर पर कभी छेत्र के नाम पर हम हिन्दुस्तानियों को बाँटकर सत्ता का स्वाद चखने के लिए ! इसीलिए जनाब आप लोग अब  कितना भी इतिहास भूगोल की खुदाई कर लें ...और एक दुसरे के पूर्वजों के चरित्र पर खोज कर लें , ये हिंदुस्तान की जनता है सब जानती है कि आज इस देश की समस्या क्या   है ....आपका दोगला चरित्र या आपके पूर्वजों का !



Friday, 21 June 2013

सब कुछ भगवान भरोसे !



कभी कभी लगता है जैसे भारत त्रासदियों का देश है , कभी प्राकृतिक विपदाएं सब कुछ बहा ले जाती है तो कभी  बम ब्लास्ट की घटनानाएं  परखचे उरा देती है!
कभी धार्मिक दंगे तो कभी निजी लफ़रे  लोगों को इतने असहिष्णु बना देता है की इन्सान इंसानियत भूल जाता है !
कभी कारगिल हमला तो कभी चीनी घुसपैठ ! बांग्लादेशियों को तो जैसे लगता है ठेका मिल चूका है भारतीय घरों की साफ सफाई का !
कभी हम जातिवादी नफरत के भेंट चढ़ जाते है तो कभी राजनेताओं के  राजनीतिक महत्वाकांछा के !
कभी नक्सलवाद गोलियों से छलनी कर जाता है तो कभी आतंकवाद !
डेंगू मच्छर के काटने से लेकर घोटालों के डंक तक   हर कोई लगता है जैसे हम भारतीयों  के ही  जान का दुश्मन बना पड़ा है !
एक लीजेंड के बेटे की सट्टेबाजी से लेकर स्पॉट फ़िक्सर के निजी महत्वाकांछा की भेंट भी हमारी भावनाये ही
चढ़ती है !
क्या यहाँ सब कुछ भगवान भरोसे है ?  या ये सिर्फ सपने देखने और दिखाने का देश है !
हाँ  यहाँ हमें सपने दिखाये जाते है न  इंडिया शाइनिंग और भारत निर्माण के तो आश्वासन दिए जाते है इंडिया ट्वेंटी ट्वेंटी (२ ० २ ० ) के !

बचपन से हमें  सिखाया जाता रहा है की
  "इंडिया इस अ ग्रेट कंट्री" !मेरा भारत महान !मेरा कल्चर महान ! मेरी सभ्त्यता महान ! मेरा धर्म महान !  उसी महानता  को ढूंढ़  रहा हूँ मै  और मेरे जैसे न जाने कितने  संवेदनशील युवा ताकि अपने देशवाशियों को बतला सकूँ की क्यों मेरा भारत महान है !पर कम्बकत दिखता तो नहीं ........
चलो ,इन सब ख़बरों के बीच एक अच्छी खबर ये है की हम चैंपियंस ट्राफी के फाइनल में है .....कम से कम हमारा क्रिकेट तो  भगवान  भरोसे नहीं है! ......क्या?  धोनी के भरोसे है…. हा हा हा हा ....

Tuesday, 18 June 2013

मंहगाई वर्सेज सेकुलरिज्म


 छह दिसम्बर १ ९ ९ २ के बाबरी मस्जिद ढहने के बाद इस देश कि  राजनीति में राजनीतिज्ञों ने एक शब्द ढूंढ़ निकाला था " धर्मनिरपेक्ष " .
इस देश की राजनीति चुनाव के वक़्त इसी के इर्द गिर्द घुमती रहती है .
कुछ ही दिनों पहले पूरा देश महगाई और भ्रस्टाचार के खिलाफ एकजुट था . ऐसा लग रहा था की अगर इस वक़्त चुनाव हो जाय तो सत्तापक्ष औंधे मुह  गिर जाये, पर आज फिर माहौल सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष हो गया है.
क्या है न कि , इस देश की जनता की याददाश्त बहुत ही कमजोर है. इलेक्शन के वक़्त राजनीतिज्ञों द्वारा फेकें गए लोलीपोप के जाल में आसानी  से फंस जाते है.
कुछ साल पहले बिहार में नीतीश  कुमार ने विकास  के नाम पर चुनाव जीता था , विकास  हुआ भी ....बिहार को पिछरेपन और अपराध  के रास्ते  से मुक्त कराकर विकास के रास्ते पर लाने में सफल भी रहे. वहां लोगों के सोचने का नजरिया भी बदला ......जात पात से ऊपर उठकर लोगों ने विकास को तरहीज दी !समय बदला, नीतीश  सरकार  की सामर्थ बदली तो सोच भी बदली और अब साहब को धर्मनिरपेक्षता  का भूत  सवार है चाहे  इसके लिए  कोई भी क़ुर्बानी क्यों न देनी पडे। गढ़बंधन टूटे या रहे ये कोई मुद्दा नहीं है .....मुद्दा है इस देश की राजनीतिक सोच फिर से एक बार धर्म और जाति  के मोह्पाश  में जकड़ गया है !
मुसलमानों को भरकाया जा रहा है कि,  मोदी दंगाई और धार्मिक है तो कुछ लोग मोदी को पिछड़ा कहकर पिछड़ो को लुभा रहे है, कुछ जनाब को विकासपुरुस बता रहे है!
हर एक  शब्द के साथ अगले लोकसभा चुनाव का भविष्य जुड़ा है! मोदी, धर्म , राहुल ,गढ़बंधन और नए समीकरणों के बीच महगाई और भ्रस्टाचार जैसे मुद्दे कहाँ गुम  हो गए पता नहीं।
इस देश की जनता की उम्मीदों की फेरहिस्त कितनी लम्बी है और कौन कौन उन उम्मीदों की फेरहिस्त में फिट बैठता है ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा पर डर  इस बात का है की कहीं फिर से अगला चुनाव का मुद्दा  जाति और धर्म के अधर्म में फंसकर न रह जाये ...असली मुद्दे गौण न हो जाये! 

Saturday, 17 July 2010

मुददा आतंकवाद है, आतंकवादी नहीं गडकरी जी |

"अफजल गुरु" कांग्रेस का दामाद है या "मौलाना मसूद अजहर"  बीजेपी का रिश्तेदार, ये तो कोई नहीं जानता, लेकिन एक बात जो हर शिक्षित भारतवासी जानता है, वो ये कि इस देश में समस्या आतंकवाद है, आतंकवादी नहीं |
गडकरी जी, इस बात कि गारंटी कौन लेगा  कि, एक अफजल गुरु को फाँसी दे देने मात्र से आतंकवादिओं के हौसले पस्त हो जायेंगे |
अफजल गुरु को फाँसी न देना कांग्रेस अपनी मज़बूरी बतलाती है, मसूद अजहर को कंधार छोड़ आना आप वक़्त कि नज़ाकत समझाते है | बीच में पिसती बेचारी आम  जनता  है  |                          वो सिर्फ सुनती,  ......... सुनती............... और सिर्फ सुनती................         रहती है | बेचारी |
सच बताऊँ तो राजनीति के इस सतरंजी खेल में राजनीतिक पार्टियाँ खिलाड़ी है और देश कि आम जनता तमाशबीन | सैनिक,  सिपाही ,पुलिस बल,..... सब के सब सतरंज के पैदल सैनिक हैं | Burocrats आपके खेल के वजीर ,घोड़े , हाथी और ऊंट  है , तो आपके मार्फ़त बनाये गये प्रधानमंत्री पद के उम्मीद्वार King  हैं |
शह और मात के इस खेल में खिलाड़ी कि तो सिर्फ हार या जीत होती है | उसी से उनका मनोरंजन होता है |
मरते तो बेचारे प्यादे हैं | किसको कब कैसे और कहाँ मारना है इसके लिए Burocrats इस्तेमाल किए जाते हैं |
और फिर, एक सफल शह या मात के बाद मोहरे फिर से सजा लिए जाते है, अगली बारी जिसकी भी हो |
गडकरी जी, गोधरा हो या गुजरात, मुंबई का दंगा हो या दिल्ली का बम ब्लास्ट इस खूनी खेल में इंसानों के साथ साथ इंसानियत भी तो मर जाती है |
फिर अपना सब कुछ गँवा चूके लोगों के बदले कि भावना का शिकार भी एक दिन यही आम जनता होती है |
सतरंज के खिलाडियों का कुछ नहीं बिगड़ता |
आपके ही पार्टी के तथाकथित  विकासवादी मुख्यमंत्री जी ने" गुजरात को गोधरा कि स्वाभाविक प्रतिक्रिया कहा था ,मगर ये कहने से पहले वो क्यों भूल गये कि दोनों ही घटनाएँ उन्ही के सल्तनत में हुई थी |
आतंकवाद यहीं से पैदा होता है जनाब गडकरी जी , जब आम जनता का विस्वास एक दुसरे पर से ख़त्म हो जाये, किसी सरकार पर से ख़त्म हो जाये |
बेशक अफजल गुरु को फाँसी होनी चाहिए , फिर कभी मसूद अजहर जैसे आतंकवादी को छोड़ने कि नौबत नहीं आनी चाहिए , लेकिन इन सब के बीच जो एक महत्वपूर्ण प्रश्न है, वो ये कि क्या ये सब, सभी धर्मों के लोगों को विस्वास में लेकर किया जा सकता है ?
खात्मा आतंकवाद का होना चाहिए, फिर तो आतंकवादी खुद व खुद ख़त्म हो जायेगा गडकरी जी | एक अफजल गुरु कि फाँसी को इतना बड़ा मुद्दा मत बनाइये ,बल्कि अफजल गुरु को बननें से रोकिये | भरोसा कायम कीजिये आम जनता का इस लोकतंत्र पर और लोकतान्त्रिक पार्टी पर |

Thursday, 8 July 2010

अब IIT में admision marks basis पर |

ये कपिल सिब्बल जी का करिश्मा है |कहते है कि पुरे देश में सिलेबस एक समान  कर देने के बाद ऐसा संभव है कि सिर्फ एक Aptitude  टेस्ट देकर  IIT में admission लिया जा सके |इससे सभी राज्यों को एक समान मौका मिलेगा | सिब्बल जी यहाँ भी राजनीति करने से नहीं चूके | क्या सिब्बल जी देश कि जनता को ये भी  आश्वस्त  कर पाएंगे कि सिलेबस एक समान कर देने से पुरे देश में शिक्षा के क्षेत्र  में एक समान सुविधाएं भी मिलनी शुरू हो जाएगी |जी हाँ, ऐसे सवाल के जबाब में सिब्बल जी को सांप सूंघ जायेगा | सिब्बल जी ये ज़रूरी नहीं है कि, अगर एक स्टुडेंट को बारहवीं में अच्छे अंक नहीं आते है, तो वह  कभी भी IIT जैसे संस्थान का हिस्सा नहीं बन सकता | इसका जीता जागता उदाहरण  Super thirty जैसे संस्थान है जिनके शत प्रतिशत स्टुडेंट इसी साल IIT  में पास हुए हैं, जरा पता तो कर के देखिये कि सभी स्टुडेंट बारहवीं में कहीं स्टेट  Topper तो नहीं हैं | शायद नहीं | इस बात से आप जैसे राजनीतिज्ञ अच्छी तरह वाकिफ होंगे |
शायद मैं सही सोच रहा हूँ | आप पूर्वाग्रह से ग्रसित है | आपकी सोच कुंठित है | आप जैसे राजनीतिज्ञ को IIT जैसे संस्थान कि मर्यादा  और प्रतिष्ठा से क्या लेना देना है | आपको तो राजनीति करना है | सारे राज्यों से vote चाहिए |फिर चाहे वह देश के लाखों मिहनती छात्रों के उम्मीदों और संभावनाओं को रौंद कर ही क्यों न मिले | IIT कि शान को मिट्टी पलीद ही क्यों न करना पड़े |
देश कि जनता ये भूल क्यों जाती है कि, आपकी ही सरकार के एक मंत्री  महोदय ने  कुछ दिन पहले AIIMS  को राजनीति का अखाड़ा बना दिया था सिर्फ अपनी झूठी शान  के खातिर | एक  सम्मानित डॉक्टर, जिसने कि अपनी पूरी कि पूरी जिन्दगी AIIMS  कि सेवा में अर्पित कर दिया था उसे भी नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ा, और उस वक़्त  आपकी सरकार तमाशा देख रही थी |आज कि तारीख में AIIMS कि हालत किसी से छुपी नहीं है |
अगर देश कि  शान को बचाए रखना है तो उसे , ऐसे राजनीतिज्ञों के कुद्रिष्टि से आजाद करना होगा |जय हिंद |

कुदरत कि लीला |पंजाब और हरियाणा बाढ़ कि चपेट में |

जी हाँ, मैं आपके दर्द को समझ सकता हूँ | सिर्फ एक साल पहले कि बात है जब पूरा का पूरा norh बिहार कुदरत के इसी त्रासदी का शिकार हुआ था | कोशी कि विनाशलीला ने सब कुछ अपने में समा लिया था |आज तक बिहार उस त्रासदी से पूरी तरह उबर नहीं पाया है |
यूँ तो पंजाब और हरियाणा में संपन्नता और विपन्नता के बीच खाई बहुत चौड़ी है, उम्मीद है कि लोग बहुत जल्द इस समस्या से निजात पा लेंगे, लेकिन एक बात जो टी.वी का लाइव टेलीकास्ट देखने के बाद समझ में आई वो ये कि प्रकृति कि मार के आगे किसी कि नहीं चलती |लोग उसी तरह उदास ,हताश,परेशान और , सरकारी मदद कि आस  में उम्मीद लगाये बैठे थे,  जैसे पिछले साल बिहार में |और सरकार अचानक आयी इस समस्या से निबटने में पूरी तरह असमर्थ थी | दाद देनी होगी इनसानी जिजीविषा कि, की लोग  इतनी विपरीत परिस्थिति में  अपनी समस्या से खुद व खुद निबट लेते हैं |