Thursday, 8 July 2010

अब IIT में admision marks basis पर |

ये कपिल सिब्बल जी का करिश्मा है |कहते है कि पुरे देश में सिलेबस एक समान  कर देने के बाद ऐसा संभव है कि सिर्फ एक Aptitude  टेस्ट देकर  IIT में admission लिया जा सके |इससे सभी राज्यों को एक समान मौका मिलेगा | सिब्बल जी यहाँ भी राजनीति करने से नहीं चूके | क्या सिब्बल जी देश कि जनता को ये भी  आश्वस्त  कर पाएंगे कि सिलेबस एक समान कर देने से पुरे देश में शिक्षा के क्षेत्र  में एक समान सुविधाएं भी मिलनी शुरू हो जाएगी |जी हाँ, ऐसे सवाल के जबाब में सिब्बल जी को सांप सूंघ जायेगा | सिब्बल जी ये ज़रूरी नहीं है कि, अगर एक स्टुडेंट को बारहवीं में अच्छे अंक नहीं आते है, तो वह  कभी भी IIT जैसे संस्थान का हिस्सा नहीं बन सकता | इसका जीता जागता उदाहरण  Super thirty जैसे संस्थान है जिनके शत प्रतिशत स्टुडेंट इसी साल IIT  में पास हुए हैं, जरा पता तो कर के देखिये कि सभी स्टुडेंट बारहवीं में कहीं स्टेट  Topper तो नहीं हैं | शायद नहीं | इस बात से आप जैसे राजनीतिज्ञ अच्छी तरह वाकिफ होंगे |
शायद मैं सही सोच रहा हूँ | आप पूर्वाग्रह से ग्रसित है | आपकी सोच कुंठित है | आप जैसे राजनीतिज्ञ को IIT जैसे संस्थान कि मर्यादा  और प्रतिष्ठा से क्या लेना देना है | आपको तो राजनीति करना है | सारे राज्यों से vote चाहिए |फिर चाहे वह देश के लाखों मिहनती छात्रों के उम्मीदों और संभावनाओं को रौंद कर ही क्यों न मिले | IIT कि शान को मिट्टी पलीद ही क्यों न करना पड़े |
देश कि जनता ये भूल क्यों जाती है कि, आपकी ही सरकार के एक मंत्री  महोदय ने  कुछ दिन पहले AIIMS  को राजनीति का अखाड़ा बना दिया था सिर्फ अपनी झूठी शान  के खातिर | एक  सम्मानित डॉक्टर, जिसने कि अपनी पूरी कि पूरी जिन्दगी AIIMS  कि सेवा में अर्पित कर दिया था उसे भी नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ा, और उस वक़्त  आपकी सरकार तमाशा देख रही थी |आज कि तारीख में AIIMS कि हालत किसी से छुपी नहीं है |
अगर देश कि  शान को बचाए रखना है तो उसे , ऐसे राजनीतिज्ञों के कुद्रिष्टि से आजाद करना होगा |जय हिंद |

कुदरत कि लीला |पंजाब और हरियाणा बाढ़ कि चपेट में |

जी हाँ, मैं आपके दर्द को समझ सकता हूँ | सिर्फ एक साल पहले कि बात है जब पूरा का पूरा norh बिहार कुदरत के इसी त्रासदी का शिकार हुआ था | कोशी कि विनाशलीला ने सब कुछ अपने में समा लिया था |आज तक बिहार उस त्रासदी से पूरी तरह उबर नहीं पाया है |
यूँ तो पंजाब और हरियाणा में संपन्नता और विपन्नता के बीच खाई बहुत चौड़ी है, उम्मीद है कि लोग बहुत जल्द इस समस्या से निजात पा लेंगे, लेकिन एक बात जो टी.वी का लाइव टेलीकास्ट देखने के बाद समझ में आई वो ये कि प्रकृति कि मार के आगे किसी कि नहीं चलती |लोग उसी तरह उदास ,हताश,परेशान और , सरकारी मदद कि आस  में उम्मीद लगाये बैठे थे,  जैसे पिछले साल बिहार में |और सरकार अचानक आयी इस समस्या से निबटने में पूरी तरह असमर्थ थी | दाद देनी होगी इनसानी जिजीविषा कि, की लोग  इतनी विपरीत परिस्थिति में  अपनी समस्या से खुद व खुद निबट लेते हैं |