Thursday, 17 December 2009

भावनावों को समझो |

सुनो सुनो.......... राहुल गाँधी जी क्या कह रहे हैं?
सुना आपने? 
हम युवाओं से, राजनीति में आने की अपील कर रहे हैं|  
दूसरी तरफ उनकी सरकार इस मंदी और बेलगाम महंगाई के दौर में भी, Professional Tax  और House Tax का ऐलान  कर चुकी है ,साथ ही VAT को 4 % से 5 % करके हम युवाओं की जेब हल्की कर रही है |
अब क्या राहुल जी ये भी बताएँगे, कि देश के लाखों बेरोजगार युवक राजनीति में कैसे आयेंगे ?
उनकी कौन सुनेगा, जो खुद अपने लिए दो वक़्त की रोटी की जुगात भी नहीं कर सकता |
और जो रोजगारपरक युवा हैं वो इस नए टैक्स के बोझ के मारे अपने घर के बिगड़े बजट को सही करने की कोशिश करेंगे या राजनीति में आएंगे ?

राहुल जी हम बताते हैं आपको...............

इस देश के सभी प्रतिभावान युवाओं को, आपकी तरह राजनीति विरासत में नहीं मिली है, जो टोकरी भर मिट्टी भी एक दिन सर पर उठा लेते हैं तो वह राजनीतिक सुर्खियाँ और इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं |  अजी हम तो ज़िन्दगी भर, सर पर मैला भी उठाएं तो भी कोई पूछने वाला नहीं होगा |

राहुल जी आप एक दलित के घर एक रात गुजारते हैं, और उसके साथ खाना  खाते हैं , तो हफ्ते भर तक ख़बरों में बने रहते हैं,  क्या देश के वो युवा जो गरीब और दलित ही पैदा हुए हैं, उन्हें भी ऐसी सुर्खियाँ मिलेंगी जो राजनीति में आयेंगे ?
राहुल जी देश के युवा आपकी तरह रोजी रोटी की समस्याओं से मुक्त नहीं है, दो वक़्त की इज्जत की रोटी ही उनके लिए पहाड़ है , वो राजनीति में क्या खाक आएंगे |
इसीलिए इस देश में राजनीति एक विरासत बनती जा रही है |
महाराष्ट्र का हाल ही का चुनाव इसका जीता जागता उदाहरण है |

राहुल जी फिर भी, इस देश के  हम लाखों युवा आपकी भावनाओं की क़द्र करते हैं |