Saturday, 17 July 2010

मुददा आतंकवाद है, आतंकवादी नहीं गडकरी जी |

"अफजल गुरु" कांग्रेस का दामाद है या "मौलाना मसूद अजहर"  बीजेपी का रिश्तेदार, ये तो कोई नहीं जानता, लेकिन एक बात जो हर शिक्षित भारतवासी जानता है, वो ये कि इस देश में समस्या आतंकवाद है, आतंकवादी नहीं |
गडकरी जी, इस बात कि गारंटी कौन लेगा  कि, एक अफजल गुरु को फाँसी दे देने मात्र से आतंकवादिओं के हौसले पस्त हो जायेंगे |
अफजल गुरु को फाँसी न देना कांग्रेस अपनी मज़बूरी बतलाती है, मसूद अजहर को कंधार छोड़ आना आप वक़्त कि नज़ाकत समझाते है | बीच में पिसती बेचारी आम  जनता  है  |                          वो सिर्फ सुनती,  ......... सुनती............... और सिर्फ सुनती................         रहती है | बेचारी |
सच बताऊँ तो राजनीति के इस सतरंजी खेल में राजनीतिक पार्टियाँ खिलाड़ी है और देश कि आम जनता तमाशबीन | सैनिक,  सिपाही ,पुलिस बल,..... सब के सब सतरंज के पैदल सैनिक हैं | Burocrats आपके खेल के वजीर ,घोड़े , हाथी और ऊंट  है , तो आपके मार्फ़त बनाये गये प्रधानमंत्री पद के उम्मीद्वार King  हैं |
शह और मात के इस खेल में खिलाड़ी कि तो सिर्फ हार या जीत होती है | उसी से उनका मनोरंजन होता है |
मरते तो बेचारे प्यादे हैं | किसको कब कैसे और कहाँ मारना है इसके लिए Burocrats इस्तेमाल किए जाते हैं |
और फिर, एक सफल शह या मात के बाद मोहरे फिर से सजा लिए जाते है, अगली बारी जिसकी भी हो |
गडकरी जी, गोधरा हो या गुजरात, मुंबई का दंगा हो या दिल्ली का बम ब्लास्ट इस खूनी खेल में इंसानों के साथ साथ इंसानियत भी तो मर जाती है |
फिर अपना सब कुछ गँवा चूके लोगों के बदले कि भावना का शिकार भी एक दिन यही आम जनता होती है |
सतरंज के खिलाडियों का कुछ नहीं बिगड़ता |
आपके ही पार्टी के तथाकथित  विकासवादी मुख्यमंत्री जी ने" गुजरात को गोधरा कि स्वाभाविक प्रतिक्रिया कहा था ,मगर ये कहने से पहले वो क्यों भूल गये कि दोनों ही घटनाएँ उन्ही के सल्तनत में हुई थी |
आतंकवाद यहीं से पैदा होता है जनाब गडकरी जी , जब आम जनता का विस्वास एक दुसरे पर से ख़त्म हो जाये, किसी सरकार पर से ख़त्म हो जाये |
बेशक अफजल गुरु को फाँसी होनी चाहिए , फिर कभी मसूद अजहर जैसे आतंकवादी को छोड़ने कि नौबत नहीं आनी चाहिए , लेकिन इन सब के बीच जो एक महत्वपूर्ण प्रश्न है, वो ये कि क्या ये सब, सभी धर्मों के लोगों को विस्वास में लेकर किया जा सकता है ?
खात्मा आतंकवाद का होना चाहिए, फिर तो आतंकवादी खुद व खुद ख़त्म हो जायेगा गडकरी जी | एक अफजल गुरु कि फाँसी को इतना बड़ा मुद्दा मत बनाइये ,बल्कि अफजल गुरु को बननें से रोकिये | भरोसा कायम कीजिये आम जनता का इस लोकतंत्र पर और लोकतान्त्रिक पार्टी पर |

Thursday, 8 July 2010

अब IIT में admision marks basis पर |

ये कपिल सिब्बल जी का करिश्मा है |कहते है कि पुरे देश में सिलेबस एक समान  कर देने के बाद ऐसा संभव है कि सिर्फ एक Aptitude  टेस्ट देकर  IIT में admission लिया जा सके |इससे सभी राज्यों को एक समान मौका मिलेगा | सिब्बल जी यहाँ भी राजनीति करने से नहीं चूके | क्या सिब्बल जी देश कि जनता को ये भी  आश्वस्त  कर पाएंगे कि सिलेबस एक समान कर देने से पुरे देश में शिक्षा के क्षेत्र  में एक समान सुविधाएं भी मिलनी शुरू हो जाएगी |जी हाँ, ऐसे सवाल के जबाब में सिब्बल जी को सांप सूंघ जायेगा | सिब्बल जी ये ज़रूरी नहीं है कि, अगर एक स्टुडेंट को बारहवीं में अच्छे अंक नहीं आते है, तो वह  कभी भी IIT जैसे संस्थान का हिस्सा नहीं बन सकता | इसका जीता जागता उदाहरण  Super thirty जैसे संस्थान है जिनके शत प्रतिशत स्टुडेंट इसी साल IIT  में पास हुए हैं, जरा पता तो कर के देखिये कि सभी स्टुडेंट बारहवीं में कहीं स्टेट  Topper तो नहीं हैं | शायद नहीं | इस बात से आप जैसे राजनीतिज्ञ अच्छी तरह वाकिफ होंगे |
शायद मैं सही सोच रहा हूँ | आप पूर्वाग्रह से ग्रसित है | आपकी सोच कुंठित है | आप जैसे राजनीतिज्ञ को IIT जैसे संस्थान कि मर्यादा  और प्रतिष्ठा से क्या लेना देना है | आपको तो राजनीति करना है | सारे राज्यों से vote चाहिए |फिर चाहे वह देश के लाखों मिहनती छात्रों के उम्मीदों और संभावनाओं को रौंद कर ही क्यों न मिले | IIT कि शान को मिट्टी पलीद ही क्यों न करना पड़े |
देश कि जनता ये भूल क्यों जाती है कि, आपकी ही सरकार के एक मंत्री  महोदय ने  कुछ दिन पहले AIIMS  को राजनीति का अखाड़ा बना दिया था सिर्फ अपनी झूठी शान  के खातिर | एक  सम्मानित डॉक्टर, जिसने कि अपनी पूरी कि पूरी जिन्दगी AIIMS  कि सेवा में अर्पित कर दिया था उसे भी नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ा, और उस वक़्त  आपकी सरकार तमाशा देख रही थी |आज कि तारीख में AIIMS कि हालत किसी से छुपी नहीं है |
अगर देश कि  शान को बचाए रखना है तो उसे , ऐसे राजनीतिज्ञों के कुद्रिष्टि से आजाद करना होगा |जय हिंद |

कुदरत कि लीला |पंजाब और हरियाणा बाढ़ कि चपेट में |

जी हाँ, मैं आपके दर्द को समझ सकता हूँ | सिर्फ एक साल पहले कि बात है जब पूरा का पूरा norh बिहार कुदरत के इसी त्रासदी का शिकार हुआ था | कोशी कि विनाशलीला ने सब कुछ अपने में समा लिया था |आज तक बिहार उस त्रासदी से पूरी तरह उबर नहीं पाया है |
यूँ तो पंजाब और हरियाणा में संपन्नता और विपन्नता के बीच खाई बहुत चौड़ी है, उम्मीद है कि लोग बहुत जल्द इस समस्या से निजात पा लेंगे, लेकिन एक बात जो टी.वी का लाइव टेलीकास्ट देखने के बाद समझ में आई वो ये कि प्रकृति कि मार के आगे किसी कि नहीं चलती |लोग उसी तरह उदास ,हताश,परेशान और , सरकारी मदद कि आस  में उम्मीद लगाये बैठे थे,  जैसे पिछले साल बिहार में |और सरकार अचानक आयी इस समस्या से निबटने में पूरी तरह असमर्थ थी | दाद देनी होगी इनसानी जिजीविषा कि, की लोग  इतनी विपरीत परिस्थिति में  अपनी समस्या से खुद व खुद निबट लेते हैं |