कभी कभी लगता है जैसे भारत त्रासदियों का देश है , कभी प्राकृतिक विपदाएं सब कुछ बहा ले जाती है तो कभी बम ब्लास्ट की घटनानाएं परखचे उरा देती है!
कभी धार्मिक दंगे तो कभी निजी लफ़रे लोगों को इतने असहिष्णु बना देता है की इन्सान इंसानियत भूल जाता है !
कभी कारगिल हमला तो कभी चीनी घुसपैठ ! बांग्लादेशियों को तो जैसे लगता है ठेका मिल चूका है भारतीय घरों की साफ सफाई का !
कभी हम जातिवादी नफरत के भेंट चढ़ जाते है तो कभी राजनेताओं के राजनीतिक महत्वाकांछा के !
कभी नक्सलवाद गोलियों से छलनी कर जाता है तो कभी आतंकवाद !
डेंगू मच्छर के काटने से लेकर घोटालों के डंक तक हर कोई लगता है जैसे हम भारतीयों के ही जान का दुश्मन बना पड़ा है !
एक लीजेंड के बेटे की सट्टेबाजी से लेकर स्पॉट फ़िक्सर के निजी महत्वाकांछा की भेंट भी हमारी भावनाये ही
चढ़ती है !
क्या यहाँ सब कुछ भगवान भरोसे है ? या ये सिर्फ सपने देखने और दिखाने का देश है !
हाँ यहाँ हमें सपने दिखाये जाते है न इंडिया शाइनिंग और भारत निर्माण के तो आश्वासन दिए जाते है इंडिया ट्वेंटी ट्वेंटी (२ ० २ ० ) के !
बचपन से हमें सिखाया जाता रहा है की
"इंडिया इस अ ग्रेट कंट्री" !मेरा भारत महान !मेरा कल्चर महान ! मेरी सभ्त्यता महान ! मेरा धर्म महान ! उसी महानता को ढूंढ़ रहा हूँ मै और मेरे जैसे न जाने कितने संवेदनशील युवा ताकि अपने देशवाशियों को बतला सकूँ की क्यों मेरा भारत महान है !पर कम्बकत दिखता तो नहीं ........
चलो ,इन सब ख़बरों के बीच एक अच्छी खबर ये है की हम चैंपियंस ट्राफी के फाइनल में है .....कम से कम हमारा क्रिकेट तो भगवान भरोसे नहीं है! ......क्या? धोनी के भरोसे है…. हा हा हा हा ....