Wednesday, 2 December 2009

मँहगाई मार गई |




मँहगाई मार गई जी हाँ टमाटर अस्सी रुपये किलो, आलू पचीस रुपये किलो , पानी पीना हुआ मँहगा, मकान का किराया तो पहले ही आसमान पर है , आम आदमी की जिन्दगी सिर्फ़ आटा और दाल के भाव मालूम करने में ही बीत जाता है इन सब से निजात पाने के लिए हाथ पैर मारना शुरु किया, तो बस का किराया बढ़ा दिया , मेट्रो वाले फ़िर क्यों पीछे रहते उसने भी किराया बढ़ाकर आम आदमी की परेशानी का लुफ्त उठाया नेताजी ...............आप तो सरकारी सुविधाओं का लुफ्त उठा रहे हो कभी आम आदमी की भी तो सोचो

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